मेरी पहली मलेशिया यात्रा – पेट्रोनास ट्विन टावर

मलेशिया मुझे हमेशा से बहुत पसंद है लेकिन कभी वहां जाने का मौका नहीं मिल सका. इस साल सितम्बर में मुझे बिज़नस टूर पर मलेशिया जाने का मौका मिला. में 26 अगस्त 2016 को मलेशिया पहुंचा.

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दिल्ली एअरपोर्ट टर्मिनल 3
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एयर एशिया, घटिया फ्लाइट का महंगा (लेकिन अच्छा) खाना
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मलेशिया एअरपोर्ट, सुन्दर और विशाल

मेरी जाने की फ्लाइट एयर एशिया एक्स थी जो शायद सबसे ही घटिया फ्लाइट थी. रात 11:10 का टाइम होने के बावजूद सुबह 1:20 पर फ्लाइट उडी. बैगेज के अलग से 3000 रूपये देने पड़े और खाना भी खरीद कर खाना पड़ा. खैर, वीसा मैंने पहले ही ले रखा था तो आराम से इमीग्रेशन हो गया.

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मलेशिया एअरपोर्ट, लम्बी ग्राहक लाइन पर सुस्त स्टाफ
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कुआला लुम्पुर शहर विमान से (मलिन्दो एयरलाइन)
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मेरी कैसिओ की घडी विमान की ऊंचाई बता रही है, 19 किलो मीटर उपर
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रात में जगमगाता कुआला लुम्पुर शहर

कुआला लुम्पुर शहर का एअरपोर्ट वैसे तो काफी बड़ा है लेकिन इमीग्रेशन का स्टाफ काफी सुस्त है जिस वजह से मेरे 3 घंटे ख़राब हो गए.

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इमीग्रेशन स्टाफ बेहद सुस्त, 10 में से 6 सीट्स खाली

 

एअरपोर्ट शहर से करीब डेढ़ घंटा दूर है और टैक्सी ने 150 रिंगिट यानी करीब 2400 रूपये ले लिए. मेरा होटल द ज़ोन रेजीडेंसी मुख्य शहर में था और पेत्रोनस ट्विन टावर के एकदम नज़दीक था. टैक्सी में से ही ट्विन टावर को देखकर दिल खुश हो गया. लम्बी यात्रा की थकान ने दिन भर कही जाने नहीं दिया तो बस दिन भर आराम किया.

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पेत्रोनस ट्विन टावर की पहली झलक टैक्सी से दिखाई पड़ी
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सुबह होटल से पेत्रोनस ट्विन टावर का नज़ारा
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होटल के कमरे की छत पर क़िबला का रुख भी दिखाया गया है. माशाल्लाह.

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अगले दिन सुबह होटल में बुफ्फे नाश्ता था जिसमे अनेक तरह की चीज़े थी जैसे अलग अलग तरह के आमलेट, कई तरह के फल, जूस, चिकन की वेराइटी, चावल, नट्स, चाय कॉफ़ी, अनेक तरह के ब्रेड, बिस्कुट्स और केक, अमेरिकन बीफ बेकोंस और कई अन्य खाने थे. इतनी विभिन्न वेराइटी खा कर दिल खुश हो गया. नाश्ते के बाद मैंने स्विमिंग पूल में डुबकी लगे और नाहा धो के तैयार हुआ. फिर ट्विन टावर तक वाक करते हुए रस्ते में बड़ी बड़ी मस्जिदे और कई ऊँची इमारते देखी.

पेत्रोनस ट्विन टावर दुनिया की सबसे बड़ी ट्विन ईमारत है. ट्विन का मतलब जुड़वाँ. ये लगभग 500 मीटर ऊँची ईमारत है. दोनों टावर के बीच में एक स्काई वाक है जो दोनों टावर को जोड़ने वाले एक पुल की तरह है. मैंने बिल्डिंग में पीछे से प्रवेश किया जहा एक बड़ा सा पार्क है और सुरिया KLCC नाम का मॉल है. पार्क में पानी के फव्वारे है जो शानदार दृश्य देते हैं. मॉल काफी महंगा है और दुनिया की सबसे महंगी ब्रांड्स वह मौजूद हैं.

 

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टावर के दूसरी तरफ ताज महल की तरह पानी के लम्बे पूल है जिनके दोनों और गार्डन बने हैं. अन्दर पत्रोनस F1 की McLaren कारें लटकाई हुई हैं. टावर में ऊपर जाने का टिकेट करीब 85 रिन्ग्गिट यानी करीब 1800 रूपये का है. मैंने टिकेट लिया और मुझे 2 घंटे बाद का नंबर मिला. क्युकी दोपहर का टाइम था तो मैं मॉल के ही एक रेस्टोरेंट में गया. सोचा था की इतना महंगा मॉल है तो रेस्टोरेंट भी महंगा होगा लेकिन वहां खाना बेहद सस्ता और लज़ीज़ था. छोटे छोटे केक केवल 3 रिन्ग्गिट यानी 35 रूपये के मिले और चाय का एक कप मात्र 2 रिन्ग्गिट यानी 24 रूपये का! बीफ स्टेक और रोस्टेड चिकन का भर पेट खाना केवल 20 रिन्ग्गिट यानी 240 रूपये में मिला. कमाल है न?

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खाने के बाद में टावर में उपर जाने की लाइन में लग गया. गले में डालने के लिए एक विजिटर कार्ड दिया गया. रस्ते में बडे हाई टेक तरीके से समझाया गया. हवा में 3D प्रोजेक्शन इतने पास से मैंने पहली बार देखा. पहली लिफ्ट हम सबको स्काई वाक तक ले गई जो 47 वी मंजिल पर है. स्काई वाक दोनों टावर को आपस में जोडती है और एक पुल की तरह है. लिफ्ट की स्पीड इतनी तेज़ थी की कान बंद हो गए. स्पेस शटल की तरह कुछ ही सेकंड्स में हम 47 मंजिल उपर पहुच गए.

स्काई वाक पर 10 मिनट बिताये और बाहर का अद्भुद नज़ारा देखा.

अब दूसरी लिफ्ट से हमारा ग्रुप 87 वी मंजिल पर आ गया जो टावर की छत से बस थोड़ी ही नीचे है. वहां से पूरे कुआला लुम्पुर का बेहद खूबसूरत नज़ारा दिखा. वो ऊंचाई का एहसास और बाहर का दृश्य आप इन तस्वीरो में केवल देख सकते है महसूस नहीं कर सकते. उपर शहर का मॉडल, टावर का मॉडल और कई अन्य हाई टेक चीज़े रखी हैं. वहाँ करीब 20 मिनट्स दिए गए.

अंत में लिफ्ट सीधा ग्राउंड फ्लोर पर ले आई वो भी स्पेस शटल की स्पीड पर. अब बाहर आकर ट्विन टावर और भी खूबसूरत लग रहे थे.

पेत्रोनस ट्विन टावर का ये ट्रिप बेहद शानदार रहा और हमेशा याद रहेगा. आप भी आइये और ट्विन टावर देखिये.

 

बाकी का लिखना अभी बाकी है, समय मिलते ही इसको पूरा करूँगा. पढने के लिए धन्यवाद.

आपका हाशिम